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The Anandam journal
Latest reflection
ओशो कहते हैं; केवल भगवान नहीं, भगवत्ता; Not Only God But Godliness. लेकिन ये भगवत्ता है क्या? अपने अंदर जाइए। ज्यादा बेहतर होगा यदि आप किसी जीवित बुद्ध यानी किसी जीवित गुरु के सानिध्य में ये साधना करें। पहले शरीर शुद्धि, फिर विचार शुद्धि, और फिर भाव शुद्धि जानिए। और साथ ही अंदर के निराकार से जुड़िए। अब इसके बाद अंतस निराकार में गूंज रहे ओंकार और उसमें व्याप्त आलोक से रूबरू होना होगा; और उसमें डूबने की कला सीखनी होगी। साथ ही साथ अब एक और विज्ञान जानना होगा; शरीर शून्यता, विचार शून्यता, और अंततः भाव शून्यता। अब आप मिट गए; ना कोई तन है, ना ही कोई मन, और ना ही कोई भाव; रह गया केवल नादमय नूरमय चैतन्य अस्तित्व। और यही है भगवत्ता। ये चैतन्यमय सकल ब्रह्मांड ही भगवत्ता है। यदि कभी इसे अनुभव करने की सघन प्यास जगे, तो फिर एक बार आनन्दम् में जरूर आइएगा।